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ब्रह्मांड और अंतरिक्ष मे क्या अंतर है? By वनिता कासनियां पंजाब उत्तर:◆ब्रह्माण्ड -universe और अन्तरिक्ष-space में अंतर है भी और नहीं भी है। यह अन्तर इन दोनों शब्दों के प्रयोग और संदर्भ पर निर्भर है।◆व्यवहार में समुद्र तल से 100 किलो मीटर या 62 की ऊंचाई से अंतरिक्ष या स्पेस आरम्भ हो जाता है इसे karman line कारमन रेखा कहते हैं। चित्र नीचे दिया है।◆अंतरराष्ट्रीय विधि के अनुसार स्पेस या अंतरिक्ष का उपयोग करने का सभी देशों को अधिकार है पर इसमें इसकी ऊंचाई फिर भी परिभाषित नहीं है।पहले इन शब्दों की व्यापक दार्शनिक और वैज्ञानिक स्थिति पर चर्चा करते हैं।★ यदि ब्रह्माण्ड universe को एक अति अति अति विशाल इकाई मानें तो अंतरिक्ष इसके भीतर ही स्थित हुआ मानना पड़ेगा।हमारी पृथ्वी इसी अंतरिक्ष में स्थित है, हम अंतरिक्ष यान भेजते हैं, ब्रह्मांड यान नहीं।यहाँ अंतरिक्ष अर्थात, space, आकाश ,गतिविधियों को कर पाने की जगह ।★★ अब हम ऐसे विशालतम ब्रह्माण्ड को एक नहीं अनेक मानें तो वे सभी अनेक ब्रह्माण्ड अंततः अंतरिक्ष में space में ही स्थित होंगे।●आधुनिक ब्रह्माण्ड विज्ञान में बहुत सारे ब्रह्मांडों Multi universe की बात भी होती है और parallel universe समांतर ब्रह्माण्ड की बात भी वैज्ञानिक करते हैं।●ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है कि नारद जी ने वैकुण्ठ लोक की बिरजा नदी में अनंत ब्रह्माण्ड पत्थर के टुकड़ों की तरह लुढ़कते देखे।●योग वाशिष्ठ में भी कई संस्तर लेयर्स में कई पैरेलल यूनिवर्स समानांतर ब्रह्मांड की चर्चा रानी लीला व देवी सरस्वती के बीच है।इन सभी तरह के ब्रह्मांडों के लिए स्थान तो लगेगा ही वही स्थान अंतरिक्ष या आकाश या स्पेस space है।जैसे कि हम अनंत आकाश गंगाओं गैलेक्सीज को अपने अंतरिक्ष में देखते हैं। और हम स्वयं भी अंतरिक्ष में स्थित हैं●● दरअसल अंतरिक्ष ,आकाश स्पेस या जगह या स्थान सभी को चाहिए होता है: चाहे बहुत बड़ी ब्रह्माण्ड की बात हो या सूक्षतम परमाणु या क्वांटा या क्वार्क इन सभी की भीतरी संरचना में स्पेस अंतरिक्ष आकाश होगा ही।पँचतत्वों की दृष्टि से आकाश सभी तत्वों में व्याप्त होता है।●अंतरिक्ष या स्पेस या आकाश के बिना पदार्थ मय ब्रह्माण्ड के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती।● ब्रह्माण्ड में और कण में- सभी में अंतरिक्ष (स्पेस खाली स्थान ) व्याप्त है; जबकि इसके उलट अंतरिक्ष स्पेस में ही स्थूल स्तर पर एक या अनेक ब्रह्माण्ड भी व्याप्त हैंऔर सूक्ष्म स्तर पर कण भी व्याप्त हैं।◆ सीमित अर्थ में अन्तरिक्ष में पक्षी उड़ रहे का अर्थ होता है हमारे देखने की सीमा में या अधिक हुआ तो पृथ्वी के ऊपर के आकाश में ।●सार यह कि ब्रह्मांड,universe, cosmos शब्द और अंतरिक्ष शब्द इन दोनों के अर्थ में अन्तर का अनुमान सन्दर्भ के अनुसार करना चाहिए।★★ व्यवहार में पृथ्वी से स्पेस या अंतरिक्ष के आरम्भ होने की सीमा क्या है?चित्र :विकीपीडिया से साभार◆अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पृथ्वी के समुद्र तल से 100 किलोमीटर अथवा 62 मील तक की ऊंचाई के बाद से अंतरिक्ष का आरम्भ माना जाता है।पृथ्वी और अंतरिक्ष के बीच इस विभाजक रेखा को करमान लाइन KARMAN line कहा जाता है।इस ऊंचाई पर सामान्यतः वायुयान हवा के विरल दबाव के कारण उड़ नहीं सकते।इसी के आगे अंतरिक्ष यान space craft 205 से 275 मील के बीच पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं।यह औसत200 मील की ऊंचाई भी अंतरिक्ष की एक दूसरी सीमा है।इसके आगे 600 मील से ऊपर वायुमण्डल अति विरल हो जाने से सूर्य मण्डल की सौर प्रवाह सोलर विंड पृथ्वी की इस ऊपरी आवरण को निरन्तर प्रभावित करता रहता है।

उत्तर:

◆ब्रह्माण्ड -universe और अन्तरिक्ष-space में अंतर है भी और नहीं भी है। यह अन्तर इन दोनों शब्दों के प्रयोग और संदर्भ पर निर्भर है।


◆व्यवहार में समुद्र तल से 100 किलो मीटर या 62 की ऊंचाई से अंतरिक्ष या स्पेस आरम्भ हो जाता है इसे karman line कारमन रेखा कहते हैं। चित्र नीचे दिया है।

◆अंतरराष्ट्रीय विधि के अनुसार स्पेस या अंतरिक्ष का उपयोग करने का सभी देशों को अधिकार है पर इसमें इसकी ऊंचाई फिर भी परिभाषित नहीं है।

पहले इन शब्दों की व्यापक दार्शनिक और वैज्ञानिक स्थिति पर चर्चा करते हैं।

★ यदि ब्रह्माण्ड universe को एक अति अति अति विशाल इकाई मानें तो अंतरिक्ष इसके भीतर ही स्थित हुआ मानना पड़ेगा।

हमारी पृथ्वी इसी अंतरिक्ष में स्थित है, हम अंतरिक्ष यान भेजते हैं, ब्रह्मांड यान नहीं।यहाँ अंतरिक्ष अर्थात, space, आकाश ,गतिविधियों को कर पाने की जगह ।

★★ अब हम ऐसे विशालतम ब्रह्माण्ड को एक नहीं अनेक मानें तो वे सभी अनेक ब्रह्माण्ड अंततः अंतरिक्ष में space में ही स्थित होंगे।

●आधुनिक ब्रह्माण्ड विज्ञान में बहुत सारे ब्रह्मांडों Multi universe की बात भी होती है और parallel universe समांतर ब्रह्माण्ड की बात भी वैज्ञानिक करते हैं।

●ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है कि नारद जी ने वैकुण्ठ लोक की बिरजा नदी में अनंत ब्रह्माण्ड पत्थर के टुकड़ों की तरह लुढ़कते देखे।

●योग वाशिष्ठ में भी कई संस्तर लेयर्स में कई पैरेलल यूनिवर्स समानांतर ब्रह्मांड की चर्चा रानी लीला व देवी सरस्वती के बीच है।

इन सभी तरह के ब्रह्मांडों के लिए स्थान तो लगेगा ही वही स्थान अंतरिक्ष या आकाश या स्पेस space है।

जैसे कि हम अनंत आकाश गंगाओं गैलेक्सीज को अपने अंतरिक्ष में देखते हैं। और हम स्वयं भी अंतरिक्ष में स्थित हैं

●● दरअसल अंतरिक्ष ,आकाश स्पेस या जगह या स्थान सभी को चाहिए होता है: चाहे बहुत बड़ी ब्रह्माण्ड की बात हो या सूक्षतम परमाणु या क्वांटा या क्वार्क इन सभी की भीतरी संरचना में स्पेस अंतरिक्ष आकाश होगा ही।

पँचतत्वों की दृष्टि से आकाश सभी तत्वों में व्याप्त होता है।

●अंतरिक्ष या स्पेस या आकाश के बिना पदार्थ मय ब्रह्माण्ड के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती।

  • ● ब्रह्माण्ड में और कण में- सभी में अंतरिक्ष (स्पेस खाली स्थान ) व्याप्त है; जबकि इसके उलट अंतरिक्ष स्पेस में ही स्थूल स्तर पर एक या अनेक ब्रह्माण्ड भी व्याप्त हैंऔर सूक्ष्म स्तर पर कण भी व्याप्त हैं।

◆ सीमित अर्थ में अन्तरिक्ष में पक्षी उड़ रहे का अर्थ होता है हमारे देखने की सीमा में या अधिक हुआ तो पृथ्वी के ऊपर के आकाश में ।

●सार यह कि ब्रह्मांड,universe, cosmos शब्द और अंतरिक्ष शब्द इन दोनों के अर्थ में अन्तर का अनुमान सन्दर्भ के अनुसार करना चाहिए।


★★ व्यवहार में पृथ्वी से स्पेस या अंतरिक्ष के आरम्भ होने की सीमा क्या है?


चित्र :विकीपीडिया से साभार

◆अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पृथ्वी के समुद्र तल से 100 किलोमीटर अथवा 62 मील तक की ऊंचाई के बाद से अंतरिक्ष का आरम्भ माना जाता है।पृथ्वी और अंतरिक्ष के बीच इस विभाजक रेखा को करमान लाइन KARMAN line कहा जाता है।इस ऊंचाई पर सामान्यतः वायुयान हवा के विरल दबाव के कारण उड़ नहीं सकते।

इसी के आगे अंतरिक्ष यान space craft 205 से 275 मील के बीच पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं।यह औसत200 मील की ऊंचाई भी अंतरिक्ष की एक दूसरी सीमा है।

इसके आगे 600 मील से ऊपर वायुमण्डल अति विरल हो जाने से सूर्य मण्डल की सौर प्रवाह सोलर विंड पृथ्वी की इस ऊपरी आवरण को निरन्तर प्रभावित करता रहता है।

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