सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

ब्रह्मांड सौर औरब्रह्मांड के बारे में सबसे डरावनी चीज क्या है ? By Vnita kasnia punjab हम ब्रह्मांड में हम इतने छोटे और असंगत हैं, इसका अंदाजा आप को अभी लग जायेगा। अगर कल पृथ्वी फट गयी तो ब्रह्मांड को इसकी भनक तक नहीं लगेगी।उदाहरण के लिए, इन तस्वीरों को देखते है ।पृथ्वी को देखते है :अब बृहस्पति और शनि की तुलना में पृथ्वी को देखें…लेकिन जब आप इसकी तुलना सूर्य से करते हैं, तो पृथ्वी धूल का एक गोला है और वहाँ आपको लगता है कि "सूरज बहुत भयानक है वास्तव में, ऐसा नहीं है। अब इसकी तुलना मिल्की वॉयस के अन्य सितारों से करते है।अच्छे से तुलना के लिए, आर्कटुरस (जो हमारे सूरज को भी छोटा कर दे ), मिल्की वॉयस में अन्य बड़े सितारों की तुलना में दिखाई देता है।Antares एक विशाल और प्रभावशाली सितारे होते है ना? खैर, आइए मिल्की वॉयस को देखें ... मुझे यकीन है कि यह मिल्की वॉयस के आगे कुछ भी नहीं है !Milky way एक प्रभावशाली आकाशगंगा है, ज़रुरी नहीं। अभी भी उनमें से लाखों खरब ब्रह्मांड में मौजूद हैं।अगर कल को पृथ्वी को कुछ हो भी जाता है, तो ब्रह्मण्ड में इसका कुछ भी असर नहीं होगा।जैसे समुद्र से एक बूंद निकाल लो।उत्तर अच्छा लगा हो तो अपवोट कीजियेगा, धन्यवाद !

हम ब्रह्मांड में हम इतने छोटे और असंगत हैं, इसका अंदाजा आप को अभी लग जायेगा। अगर कल पृथ्वी फट गयी तो ब्रह्मांड को इसकी भनक तक नहीं लगेगी।

उदाहरण के लिए, इन तस्वीरों को देखते है ।

पृथ्वी को देखते है :

अब बृहस्पति और शनि की तुलना में पृथ्वी को देखें…

लेकिन जब आप इसकी तुलना सूर्य से करते हैं, तो पृथ्वी धूल का एक गोला है और वहाँ आपको लगता है कि "सूरज बहुत भयानक है वास्तव में, ऐसा नहीं है। अब इसकी तुलना मिल्की वॉयस के अन्य सितारों से करते है।

अच्छे से तुलना के लिए, आर्कटुरस (जो हमारे सूरज को भी छोटा कर दे ), मिल्की वॉयस में अन्य बड़े सितारों की तुलना में दिखाई देता है।

Antares एक विशाल और प्रभावशाली सितारे होते है ना? खैर, आइए मिल्की वॉयस को देखें ... मुझे यकीन है कि यह मिल्की वॉयस के आगे कुछ भी नहीं है !

Milky way एक प्रभावशाली आकाशगंगा है, ज़रुरी नहीं। अभी भी उनमें से लाखों खरब ब्रह्मांड में मौजूद हैं।

अगर कल को पृथ्वी को कुछ हो भी जाता है, तो ब्रह्मण्ड में इसका कुछ भी असर नहीं होगा।

जैसे समुद्र से एक बूंद निकाल लो।

उत्तर अच्छा लगा हो तो अपवोट कीजियेगा, धन्यवाद !

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मंगल ग्रह पर क्या कभी परमाणु युद्ध हुआ था? क्या वहाँ कभी इंसान रहते थे? By Vnita kasnia Punjab मंगल ग्रह के चित्र को अगर आप देखते हैं तो आप पाएंगे कि मंगल ग्रह पर कुछ अजीब लाइंस खींची हुई है जो कि वाकई बहुत डरावनी और अजीब है।सबसे अजीब बात यह है कि यह इतनी बड़ी दूरी में बनी हुई है, कि इसे आसानी के साथ चित्र में देखा जा सकता है ( इस आर्टिकल्स के साथ मैंने कुछ चित्र को भी साझा किया है जो आप को समझने में मदद करेंगी ) कि मैं किस लाइंस की बात कर रहा हूं यह लाइंस इतनी बड़ी है जितना बड़ा पूरा रूस का भाग है जोकि देखने में प्राकृतिक बिल्कुल नहीं लगती।प्राचीन अंतरिक्ष विचारक भी मंगल ग्रह पर जीवन होने का दावा करते हैं माया सभ्यता ने भी मंगल ग्रह पर कभी जीवन होने की बात कही थी ।आधुनिक साइंटिस्ट मानते हैं कि मंगल ग्रह पर पृथ्वी की ही तरह जीवन था और टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट जैसा कि हम पृथ्वी पर इस दौर में अनुभव कर रहे हैं उससे भी कहीं अधिक एडवांस टेक्नोलॉजी मंगल ग्रह पर कभी हुई थी ।जैसा कि हम देख सकते हैं, आज के समय में हम परमाणु हथियारों से घिरे हुए हैं हर देश के पास कोई ना कोई एटॉमिक या परमाणु हथियार मौजूद है या होने वाला है और जो तेजी से बढ़ रहा है ।अंतरिक्ष विचारक मानते हैं कि मंगल ग्रह पर भी वहा के निवासियों में तनाव होने के बाद युद्ध हुआ होगा जिसमें मंगल ग्रह और वहां के निवासी तबाह हो गए, यह बातें बहुत गहन अध्ययन के बाद और मंगल की संरचना को देखने पर कही गई हालांकि इस बात पर कभी सत्यापन की मुहर नहीं लगी।कुछ अंतरिक्ष विचारकों का यह भी मानना है कि युद्ध के दौरान कुछ मंगल निवासी पृथ्वी पर आ गए और पृथ्वी कोई अपना निवास स्थान मान लिया। कुछ समय पहले इस पर एक प्रोग्राम जो "हिस्ट्री टीवी" पर आता है "एन्शियंट एलियन" में कही गई इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई जो कि अंतरिक्ष विद्वानों द्वारा बनाई गई थी।क्या यह सच है ? कि एक एडवांस सभ्यता एक एटॉमिक युद्ध में पूरी तरीके से समाप्त हो सकती है, क्योंकि नासा के वैज्ञानिकों ने भी मंगल की धरती पर रेडियो एक्टिव पार्टिकल्स प्राप्त किए जो कि काफी हद तक इशारा करते हैं कि मंगल ग्रह पर परमाणु युद्ध हुआ था।कुछ महीने पहले नासा के "आॉपरचुनेटी" रोवर ने बहुत सारी ऐसी कड़ियां पाई जो यह स्थिति को दर्शाती है कि मंगल ग्रह पर कुछ तो ऐसा हुआ था जिसकी वजह से वहां का पूरा प्रारूप ही बदल गया नासा ने यह माना है कि मंगल ग्रह पर कभी पानी मौजूद था हालांकि नासा मानता है कि हो सकता है अभी भी सॉलिड या आइस कैप्स की संरचना में पानी मंगल ग्रह पर सतह के नीचे मौजूद हो अगर मंगल ग्रह पर पानी मिल जाता है तो मंगल ग्रह को पृथ्वी की ही तरह फिर से बचाया जा सकता है क्योंकि मंगल और पृथ्वी में बहुत अंतर नहीं है चाहे वह वातावरण से संबंधित या फिर भौगोलिक स्थिति से संबंधित क्यों ना हो।क्या आपको लगता है ? कि हमारी दुनिया भी ऐसे ही एक परमाणु युद्ध की तरफ बढ़ रही है कुछ दिनों पहले ईरान ने (जो एक परमाणु देश नहीं है उसने) भी अमेरिका के ऊपर परमाणु हमला करने की बात कही इस बात से हम क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं क्या ईरान के पास भी परमाणु हथियार है जो ईरान ने दुनिया के नजरों से छुपा कर रखा है भूतकाल में भी ऐसी कई घटनाओं ने पूरी दुनिया को खतरे में डाल दिया था जैसे कि जापान पर दो परमाणु हमला।vnitakasniapunjab05114@gmail.comऔर भी बहुत सारी जानकारियां इस बात को और पुख्ता बनाती है कि मंगल ग्रह पर भी कभी जीवन था जो किसी भयानक स्थिति में मंगल ग्रह के जीवन को खत्म करके सन्नाटा छोड़ गया।ज्यादा जानकारी के लिए आप एंशियंट एलियंश सीज़न 14 - "न्युक्लियर वार्स आॉन मार्स" देख सकते हैं।अगर आपको यह जानकारी पसंद आई तो आप अपवोट कर के मुझे और लिखने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।धन्यवाद।

मंगल ग्रह पर क्या कभी परमाणु युद्ध हुआ था? क्या वहाँ कभी इंसान रहते थे? By Vnita kasnia Punjab मंगल ग्रह के चित्र को अगर आप देखते हैं तो आप पाएंगे कि मंगल ग्रह पर कुछ अजीब लाइंस खींची हुई है जो कि वाकई बहुत डरावनी और अजीब है। सबसे अजीब बात यह है कि यह इतनी बड़ी दूरी में बनी हुई है, कि इसे आसानी के साथ चित्र में देखा जा सकता है ( इस आर्टिकल्स के साथ मैंने कुछ चित्र को भी साझा किया है जो आप को समझने में मदद करेंगी ) कि मैं किस लाइंस की बात कर रहा हूं यह लाइंस इतनी बड़ी है जितना बड़ा पूरा रूस का भाग है जोकि देखने में प्राकृतिक बिल्कुल नहीं लगती। प्राचीन अंतरिक्ष विचारक भी मंगल ग्रह पर जीवन होने का दावा करते हैं माया सभ्यता ने भी मंगल ग्रह पर कभी जीवन होने की बात कही थी ।आधुनिक साइंटिस्ट मानते हैं कि मंगल ग्रह पर पृथ्वी की ही तरह जीवन था और टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट जैसा कि हम पृथ्वी पर इस दौर में अनुभव कर रहे हैं उससे भी कहीं अधिक एडवांस टेक्नोलॉजी मंगल ग्रह पर कभी हुई थी । जैसा कि हम देख सकते हैं, आज के समय में हम परमाणु हथियारों से घिरे हुए हैं हर देश के पास कोई ना कोई एटॉमिक या परमाणु हथ...

ईश्वर कहाँ रहता है ? By वनिता कासनियां पंजाब ईश्वर कहाँ रहता है ?अस्वीकरण: इस उत्तर में प्रगट किए गए विचारों से कोई भी असहमत हो सकता है।✍️ वैसे यह सवाल आस्तिकों केलिए ही नहीं, नास्तिकों केलिए भी महत्वपूर्ण है।क्योंकि नास्तिक भी तब ही नास्तिक बनते हैं, जब उन्हे ईश्वर के होने का कोई तथ्य यां सबूत नजर नहीं आता। विज्ञान भी हाथ खड़े कर देता है।तो नास्तिक भी उसके पीछे पीछे चलने लगता है।तो आज हम अवश्य बताएंगे कि वो अनंत, वो सत्य कहां रहता है। जिसकी शक्ति से पूरी सृष्टि गतिमान है।अब अगर हम सबसे प्राचीन वेदों और गीता को आधार बनाते हुए, उनके इशारे को समझें, तो सृष्टि यां ब्रह्मांड ऐसे पेड़ के बराबर हैं, जिसकी जड़ें उपर की और हैं और फल फूल नीचे की और हैं।यानी उल्टा।जैसे मनुष्य के शरीर का सहस्त्रार चक्र एक पेड़ की जड़ यां बीज के समान है और मूलाधार चक्र एक फल और फूल के।ऐसे ही ब्रह्मांड रूपी पेड़ में, समूह मनुष्य, जानवर, पेड़ पौधे आदि फल और फूल के रूप में हैं और पेड़ रूपी ब्रह्मांड की जड़ें और बीज उपर की और है, बहुत उपर की और।अब जैसे हम पृथ्वी पर हैं तो इसे भूलोक कहा जाता है। ऐसे ही उपर बढ़ते जाएं तो स्वर्गलोक, फिर तप लोग और अंत यां आदि में सत्यलोक है।यानी अंतरिक्ष से अरबों योजन दूर सत्य लोक है।जिसको ऋग्वेद में ऋतधाम कहा गया है और गीता में परमधाम।यहां पर उस अनंत, अजन्मे, निराकार और सत्य, ईश्वर का वास है। जिस की शक्ति यां प्रकाश से सारा ब्रह्मांड गतिमान है।मनुष्य वहां सिर्फ मोक्ष के बाद, पवित्र आत्मा के रूप में ही जा सकता है।यहां कोई जन्म मृत्यु नहीं है, सिर्फ अमरता है।तो ब्रह्मांड में मनुष्य क्या सभी प्रकार के जीव जंतु, पेड़ उस अनंत की शक्ति से ही चलायमान हैं।अब विज्ञान कहता है कि हम पृथ्वी पर 3 आयाम (Demension) में रह रहे हैं, यानी 3D.जैसे आगे पीछे, दाएं बाएं और उपर नीचे। यानी लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई यां गहराई।हम सिर्फ इसके बारे में जानते हैं।पर चौथा आयाम समय भी है।तो विज्ञान भी मानता है कि ब्रह्मांड में10 आयाम हो सकते हैं।वेद 64 आयाम की बात करता हैं।यह आयाम अवश्य हो सकते हैं, पर भूलोक में नहीं, उपर के लोकों में।जिसके बारे विज्ञान ग्रहों, ग्लैक्सियों, वॉर्म होल, ब्लैक होल की बात करता है तो वेद जैसे शास्त्र इन्हे लोक कहते हैं।शायद आज भी विज्ञान ब्रह्मांड के बारे में बहुत कम जानता है।क्योंकि हमारा ब्रह्मांड आज भी बहुत सारे रहस्य समेटे हुए हैं। जिनसे पर्दा हटना बाकी है।यह यूहीं नहीं चल रहा है। इन्हे कोई ना कोई शक्ति तो अवश्य चला रही है।वहीं शक्ति, जिन्हे अनंत कह लो, अजन्मा कह लो, निराकार कह लो यां सत्य कह लो। जिसे आदि कह लो यां अंत कह लो यां शून्य कह लो।बात एक ही है। वही तो ईश्वर है।बहुत बहुत धन्यवाद। 🙏🙏चित्र स्रोत:सभी चित्र विषय की स्पष्टता केलिए गूगल इमेजेस के द्वारा लिए गए हैं, आभार सहित। जिनके अधिकार, इनके असल मालिकों के पास पूर्ण सुरक्षित हैं।

ईश्वर कहाँ रहता है ? By वनिता कासनियां पंजाब ईश्वर कहाँ रहता है ? अस्वीकरण:  इस उत्तर में प्रगट किए गए विचारों से कोई भी असहमत हो सकता है। ✍️  वैसे यह सवाल आस्तिकों केलिए ही नहीं, नास्तिकों केलिए भी महत्वपूर्ण है। क्योंकि नास्तिक भी तब ही नास्तिक बनते हैं, जब उन्हे ईश्वर के होने का कोई तथ्य यां सबूत नजर नहीं आता। विज्ञान भी हाथ खड़े कर देता है। तो नास्तिक भी उसके पीछे पीछे चलने लगता है। तो आज हम अवश्य बताएंगे कि वो अनंत, वो सत्य कहां रहता है। जिसकी शक्ति से पूरी सृष्टि गतिमान है। अब अगर हम सबसे प्राचीन वेदों और गीता को आधार बनाते हुए, उनके इशारे को समझें, तो सृष्टि यां ब्रह्मांड ऐसे पेड़ के बराबर हैं, जिसकी जड़ें उपर की और हैं और फल फूल नीचे की और हैं। यानी उल्टा। जैसे मनुष्य के शरीर का सहस्त्रार चक्र एक पेड़ की जड़ यां बीज के समान है और मूलाधार चक्र एक फल और फूल के। ऐसे ही ब्रह्मांड रूपी पेड़ में, समूह मनुष्य, जानवर, पेड़ पौधे आदि फल और फूल के रूप में हैं और पेड़ रूपी ब्रह्मांड की जड़ें और बीज उपर की और है, बहुत उपर की और। अब जैसे हम पृथ्वी पर हैं तो इसे भूलोक कहा जाता है। ऐस...

सौर मंडल के बारे में रोचक जानकारी जब भी आकाश की चर्चा की जाती है या सौरमंडल भी चर्चा की जाती है तो उसमें ग्रह की बात सबसे पहले की जाती है सौरमंडल में आठ ग्रह है ग्रहों की की विशेषता और कुछ कारण है जो इनको एक दूसरे से अलग बनाते हैं और क्या ऐसे कारण है जो इन सभी ग्रह को एक दूसरे से अलग बनाते हैं इन ग्रहों को दो कैटेगरी में बांटा गया है पहले चार ग्रहों को Terrestrial Planets कहा जाता है जो थोड़े ठोस प्रकार की है तो दूसरे चार ग्रहों को Gas Giants के नाम से जाना जाता है जो थोड़े कम ठोस है ज्यादातर गैस से निर्मित है पहले चार ग्रह Mercury Venus Earth Mars यह सब Terrestrial कैटेगरी में आते हैं और Jupiter., Saturn.Uranus.Neptune. गैस जेंट्स की कैटेगरी में आते हैं.

सौर मंडल के बारे में रोचक जानकारी  जब भी आकाश की चर्चा की जाती है या सौरमंडल भी चर्चा की जाती है तो उसमें ग्रह की बात सबसे पहले की जाती है सौरमंडल में आठ ग्रह है ग्रहों की की विशेषता और कुछ कारण है जो इनको एक दूसरे से अलग बनाते हैं और क्या ऐसे कारण है जो इन सभी ग्रह को एक दूसरे से अलग बनाते हैं इन ग्रहों को दो कैटेगरी में बांटा गया है पहले चार ग्रहों को Terrestrial Planets कहा जाता है जो थोड़े ठोस प्रकार की है तो दूसरे चार ग्रहों को Gas Giants के नाम से जाना जाता है जो थोड़े कम ठोस है ज्यादातर गैस से निर्मित है पहले चार ग्रह Mercury Venus Earth Mars यह सब Terrestrial कैटेगरी में आते हैं और Jupiter. ,  Saturn.Uranus.Neptune. गैस जेंट्स की कैटेगरी में आते हैं.