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सौर मंडल बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम वर्ष 2022 में भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र खासकर अंतरिक्ष के क्षेत्र में काफी सफलता हासिल की है। पिछले एक साल में भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। पिछले दिनों इसरो ने भारत के पहले निजी रॉकेट ‘विक्रम-एस’ का श्रीहरिकोटा में सफल प्रक्षेपण किया था। एक और अभियान में इसरो ने हाल में ही पीएसएलवी-सी54 के जरिए ओशनसैट-3 और आठ लघु उपग्रह- भूटानसैट, पिक्सेल का ‘आनंद’, धुव अंतरिक्ष के दो थायबोल्ट और स्पेसफ्लाइट यूएसए के चार एस्ट्रोकास्ट-लॉन्च किए। अक्टूबर महीनें में इसरो ने ब्रिटिश कंपनी वनवेब के लिए 36 कृत्रिम उपग्रहों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित करके एक बड़ी सफलता हासिल की थी।इसरो ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में काफी सफलता हासिल कर लिया है, लेकिन अब समय आ गया है जब इसरो व्यावसायिक सफलता के साथ अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की तरह अंतरिक्ष अन्वेषण पर भी ध्यान दे। इसरो को अंतरिक्ष अन्वेषण और शोध के लिए दीर्घकालिक रणनीति बनानी होगी, क्योंकि जैसे-जैसे अंतरिक्ष के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी अंतरिक्ष अन्वेषण बेहद महत्त्वपूर्ण होता जाएगा। इस काम इसके लिए सरकार को इसरो का सालाना बजट भी बढ़ाना पड़ेगा, जो फिलहाल नासा के मुकाबले काफी कम है। भारी विदेशी उपग्रहों को अधिक संख्या में प्रक्षेपित करने के लिए अब हमें पीएसएलवी के साथ-साथ जीएसएलवी रॉकेट का भी उपयोग करना होगा। पीएसएलवी अपनी सटीकता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन ज्यादा भारी उपग्रहों के लिए जीएसएलवी का प्रयोग अब बहुतायत में करना होगा। वैसे तो भारत के पहले सफल चंद्र मिशन और मंगल मिशन के बाद से ही इसरो व्यावसायिक तौर पर काफी सफल रहा है और इसरों के प्रक्षेपण की बेहद कम लागत की वजह से दुनिया भर के कई देश अब इसरो से अपने उपग्रहों की लांचिंग करा रहे हैं। अंतरिक्ष बाजार में भारत के लिए संभावनाएं बढ़ रही है, इसने अमेरिका सहित कई बड़े देशों का एकाधिकार तोड़ा है। पिछले दिनों दुश्मन मिसाइल को हवा में ही नष्ट करनें की क्षमता वाली इंटरसेप्टर मिसाइल का सफल प्रक्षेपण इस बात का सबूत है कि भारत बैलेस्टिक मिसाइल रक्षा तंत्र के विकास में भी बड़ी कामयाबी हासिल कर चुका है। दुश्मन के बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही ध्वस्त करने के लिए भारत ने सुपरसोनिक इंटरसेप्टर मिसाइल बना कर दुनिया के विकसित देशों की नींद उड़ा दी है। एक समय ऐसा भी था जब अमेरिका ने भारत के उपग्रहों को लांच करने से मन कर दिया था। आज स्थिति ये है कि अमेरिका सहित तमाम देश खुद भारत के साथ व्यावसायिक समझौता करने को इच्छुक हैं। अब पूरी दुनिया में सेटेलाइट के माध्यम से टेलीविजन प्रसारण, मौसम की भविष्यवाणी और का दूरसंचार का क्षेत्र बहुत तेज गति से बढ़ रहा है और चूंकि ये सभी सुविधाएं उपग्रहों के माध्यम से संचालित होती हैं। इसलिए संचार उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करने की मांग में बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि इस क्षेत्र में चीन, रूस, जापान आदि देश प्रतिस्पर्धा में हैं, लेकिन यह बाजार इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि यह मांग उनके सहारे पूरी नहीं की जा सकती। ऐसे में व्यावसायिक तौर पर यहां भारत के लिए बहुत संभावनाएं है। कम लागत और सफलता की गारंटी इसरो की सबसे बड़ी ताकत है जिसकी वजह से स्पेस इंडस्ट्री में आने वाला समय भारत के एकाधिकार का होगा। याद करिए कि नवम्बर 2007 में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस ने कहा था कि वह चंद्रयान-2 प्रोजेक्ट में भारत के साथ काम करते हुए इसरो को लैंडर देगा। जनवरी 2013 में लॉन्चिंग तय थी, लेकिन रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस लैंडर नहीं दे पाई या नहीं दिया। बाद में भारत ने खुद अपना लैंडर-रोवर बनाया। इस बात से यह साफ हो गया कि हमारे वैज्ञानिक किसी के मोहताज नहीं हैं। वे कोई भी मिशन पूरा कर सकते हैं। अब तो अमेरिका भी अपने सैटेलाइट लॉन्चिंग के लिए भारत की लगातार मदद ले रहा है, जो अंतरिक्ष बाजार में भारत की धमक का स्पष्ट संकेत है। वास्तव में नियमित रूप से विदेशी उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण ‘भारत की अंतरिक्ष क्षमता की वैश्विक अभिपुष्टि’ है। अमेरिका की फ्यूट्रान कॉरपोरेशन की एक शोध रिपोर्ट भी बताती है कि अंतरिक्ष जगत के बड़े देशों के बीच का अंतरराष्ट्रीय सहयोग रणनीतिक तौर पर भी सराहनीय है। वास्तव में इस क्षेत्र में किसी के साथ सहयोग या भागीदारी सभी पक्षों के लिए लाभदायक स्थिति है। इससे बड़े पैमाने पर लगने वाले संसाधनों का बंटवारा हो जाता है। खासतौर पर इसमें होने वाले भारी खर्च का। यह भारतीय अंतरिक्ष उद्योग की वाणिज्यिक प्रतिस्पर्धा की श्रेष्ठता का गवाह भी है। भारत जल्दी ही चंद्रमा पर अपना तीसरा मिशन चंद्रयान-3 लॉन्च कर सकता है। चंद्रयान-3; चंद्रयान-2 का उत्तराधिकारी है और यह चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास करेगा। इसरो के अनुसार, चंद्रयान-3 से संबंधित टीम का गठन किया जा चुका है और इस मिशन पर सुचारू रूप से कार्य प्रारंभ है। इसरो के अनुसार चंद्रयान-3 का मुख्य उद्देश्य ऐसी खोज करना है जिससे भारत के साथ ही पूरी मानवता को फायदा होगा। इन परीक्षणों और अनुभवों के आधार पर ही भावी चंद्र अभियानों की तैयारी में जरूरी बड़े बदलाव होंगे। ताकि भविष्य के चंद्र अभियानों की नई टेक्नोलॉजी को बनाने और उन्हें तय करने में मदद मिले। मिशन के मुख्य उद्देश्यों में चंद्रमा पर पानी की मात्रा का अनुमान लगाना, उसके जमीन, उसमें मौजूद खनिजों एवं रसायनों तथा उनके वितरण का अध्ययन करना, उसकी भूकंपीय गतिविधियों का अध्ययन और चंद्रमा के बाहरी वातावरण की ताप-भौतिकी गुणों का विश्लेषण है। कुल मिलाकर चंद्रयान-3 मिशन भारत के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है साथ ही यह मिशन भविष्य में अंतरिक्ष शोध की नई संभावनाओं को भी जन्म देगा। भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में नई सफलताएं हासिल कर विकास को अधिक गति दे सकता है। देश में गरीबी दूर करने और विकसित भारत के सपने को पूरा करने में इसरो काफी मददगार साबित हो सकता है। अब समय आ गया है जब इसरो व्यावसायिक सफलता के साथ-साथ नासा की तरह अंतरिक्ष अन्वेषण और शोध पर भी ज्यादा ध्यान दे, जिससे की भारत के साथ साथ दुनिया को भी नई दिशा मिल सके।

सौर मंडल बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम वर्ष 2022 में भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र खासकर अंतरिक्ष के क्षेत्र में काफी सफलता हासिल की है। पिछले एक साल में भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से बदल रहा है।  पिछले दिनों इसरो ने भारत के पहले निजी रॉकेट ‘विक्रम-एस’ का श्रीहरिकोटा में सफल प्रक्षेपण किया था। एक और अभियान में इसरो ने  हाल में ही पीएसएलवी-सी54 के जरिए ओशनसैट-3 और आठ लघु उपग्रह- भूटानसैट, पिक्सेल का ‘आनंद’, धुव अंतरिक्ष के दो थायबोल्ट और स्पेसफ्लाइट यूएसए के चार एस्ट्रोकास्ट-लॉन्च किए। अक्टूबर महीनें में इसरो ने  ब्रिटिश कंपनी वनवेब के लिए 36 कृत्रिम उपग्रहों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित करके एक बड़ी सफलता हासिल की थी।इसरो ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में काफी सफलता हासिल कर लिया है, लेकिन अब समय आ गया है जब इसरो व्यावसायिक सफलता के साथ अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की तरह अंतरिक्ष अन्वेषण पर भी ध्यान दे। इसरो को अंतरिक्ष अन्वेषण और शोध के लिए दीर्घकालिक रणनीति बनानी होगी, क्योंकि जैसे-जैसे अंतरिक्ष के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी अंतरिक्ष अन्वेषण बेहद महत्त्वपूर्ण ...

ब्रह्मांड सौर औरब्रह्मांड के बारे में सबसे डरावनी चीज क्या है ? By Vnita kasnia punjab हम ब्रह्मांड में हम इतने छोटे और असंगत हैं, इसका अंदाजा आप को अभी लग जायेगा। अगर कल पृथ्वी फट गयी तो ब्रह्मांड को इसकी भनक तक नहीं लगेगी।उदाहरण के लिए, इन तस्वीरों को देखते है ।पृथ्वी को देखते है :अब बृहस्पति और शनि की तुलना में पृथ्वी को देखें…लेकिन जब आप इसकी तुलना सूर्य से करते हैं, तो पृथ्वी धूल का एक गोला है और वहाँ आपको लगता है कि "सूरज बहुत भयानक है वास्तव में, ऐसा नहीं है। अब इसकी तुलना मिल्की वॉयस के अन्य सितारों से करते है।अच्छे से तुलना के लिए, आर्कटुरस (जो हमारे सूरज को भी छोटा कर दे ), मिल्की वॉयस में अन्य बड़े सितारों की तुलना में दिखाई देता है।Antares एक विशाल और प्रभावशाली सितारे होते है ना? खैर, आइए मिल्की वॉयस को देखें ... मुझे यकीन है कि यह मिल्की वॉयस के आगे कुछ भी नहीं है !Milky way एक प्रभावशाली आकाशगंगा है, ज़रुरी नहीं। अभी भी उनमें से लाखों खरब ब्रह्मांड में मौजूद हैं।अगर कल को पृथ्वी को कुछ हो भी जाता है, तो ब्रह्मण्ड में इसका कुछ भी असर नहीं होगा।जैसे समुद्र से एक बूंद निकाल लो।उत्तर अच्छा लगा हो तो अपवोट कीजियेगा, धन्यवाद !

ब्रह्मांड सौर और ब्रह्मांड के बारे में सबसे डरावनी चीज क्या है ? By Vnita kasnia punjab हम ब्रह्मांड में हम इतने छोटे और असंगत हैं, इसका अंदाजा आप को अभी लग जायेगा। अगर कल पृथ्वी फट गयी तो ब्रह्मांड को इसकी भनक तक नहीं लगेगी। उदाहरण के लिए, इन तस्वीरों को देखते है । पृथ्वी को देखते है : अब बृहस्पति और शनि की तुलना में पृथ्वी को देखें… लेकिन जब आप इसकी तुलना सूर्य से करते हैं, तो पृथ्वी धूल का एक गोला है और वहाँ आपको लगता है कि "सूरज बहुत भयानक है वास्तव में, ऐसा नहीं है। अब इसकी तुलना मिल्की वॉयस के अन्य सितारों से करते है। अच्छे से तुलना के लिए, आर्कटुरस (जो हमारे सूरज को भी छोटा कर दे ), मिल्की वॉयस में अन्य बड़े सितारों की तुलना में दिखाई देता है। Antares एक विशाल और प्रभावशाली सितारे होते है ना? खैर, आइए मिल्की वॉयस को देखें ... मुझे यकीन है कि यह मिल्की वॉयस के आगे कुछ भी नहीं है ! Milky way एक प्रभावशाली आकाशगंगा है, ज़रुरी नहीं। अभी भी उनमें से लाखों खरब ब्रह्मांड में मौजूद हैं। अगर कल को पृथ्वी को कुछ हो भी जाता है, तो ब्रह्मण्ड में इसका कुछ भी असर नहीं होगा। जैसे समुद्र स...

क्या यह संभव है कि पृथ्वी की सतह पर कोई वस्तु इतनी भारी हो कि वह पृथ्वी की गति को बदल दे? By वनिता कासनियां पंजाब थ्री गोर्जेस डैमयह बांध चीन के हुबेई प्रांत में स्थित है, और यह पृथ्वी पर सबसे बड़ा पनबिजली परियोजना है, जो 22,500 मेगावाट उत्पादन करने में सक्षम है। जब इसे भरा जाता है तो पानी समुद्र तल से 175 मीटर और नदी तल से 95 मीटर ऊपर होता है। इस संचित जल भंडार से 632 वर्ग किलोमीटर तक बाढ़ की क्षमता रखता है और इसमें 42 बिलियन टन पानी आ सकता है।नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार जब यह बांध भर जाता है, moment of inertia नामक एक घटना होती है, जो पृथ्वी के घूर्णन को प्रभावित करती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, पूरा बांध पृथ्वी के घूमने को धीमा कर देता है, दिन की लंबाई को 0.06 माइक्रोसेकंड तक बढ़ा देता है और यहां तक ​​कि ग्रह के आकार को बदलने की क्षमता रखता है।धन्यवाद🙏

इंसानी दिमाग के बारे कुछ चकित कर देने वाले रोचक तथ्य क्या हैं? By वनिता कासनियां पंजाब द्वारा 1.] हमारे दिमाग में कई ऐसे हिस्से है जो बंद पड़े है और वो हिस्से तभी खुलते है जब हम दिमाग से कसरत करवाते है कहने का मतलब आप जितना अधिक सीखते चले जाओगे, जितना अधिक दिमाग का इस्तेमाल करके उससे काम करवाओगे उतनी ही तेज़ी से आपके दिमाग के बंद हिस्से खुलने शुरू हो जाएंगे और आपका दिमाग तेज़ होना शुरू हो जाएगा। इसलिए लगातार अपनी फील्ड के बारे में पढ़ते जाएं और नया सीखते जाएं। 2.] हम कोई भी वस्तु अपने आंखों से नहीं बल्कि अपने दिमाग़ की मदद से देख पाते हैं आंख सिर्फ information लेता है और उसका प्रतिबिम्ब रेटिना पर बनाकर हमारे दिमाग़ तक पहुँचाता है। 3.] पूरे दिन की तुलना में लंच के बाद हमारी याददाश्त सबसे ज़्यादा कमजोर होती है। 4.] किसी के ना बोलने पर भी खुद का नाम सुनाई देना एक स्वस्थ दिमाग की निशानी है। 5 ] पूरी जिंदगी में हमारा दिमाग लगभग 10 लाख GB डेटा स्टोर करता हैं।
हाइपरसोनिक मिसाइल के बाद अब चीन बना रहा हाइपरसोनिक गोली, 4 किमी प्रति सेकंड की स्पीड से सूअरों पर लगाया निशाना, ऐसा मिला रिजल्ट Curated by वनिता कासनियां पंजाब   Hypersonic Bullet By China: चीन हाइपरसोनिक तकनीक में तेजी से आगे बढ़ रहा है। चीन हाइपरसोनिक मिसाइल क Show More चीन ने हाइपरसोनिक गोली का किया टेस्ट। हाइलाइट्स चीन एक ऐसी गोली विकसित कर रहा है जो हाइपरसोनिक स्पीड से फायर हो चीन में इस गोली का एक टेस्ट सूअरों पर किया गया है जिसके रिजल्ट आए हैं इस गोली की स्पीड ही इसके विकास में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है बीजिंग:  चीन आवाज से पांच गुना ज्यादा स्पीड यानी हाइपरसोनिक स्पीड से चलने वाले मिसाइल और इंजन के निर्माण में लगा है। लेकिन अब अपने हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट के आकार को चीन ने छोटा करने का फैसला किया है। चीन हाइपरसोनिक स्पीड से चलने वाली गोली बना रहा है। चीन ने हाल ही में इस तरह की गोली के प्रोटोटाइप का टेस्ट जिंदा टार्गेट पर भी किया है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक चोंगकिंग में एक आर्मी मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने हाल ही में 11 मैक (11 Mach) की स्पीड से फ...

Neptune(वरुण) ,,नेप्चून सूर्य से दूर हिसाब से सूर्य से दूरी के हिसाब से सौरमंडल का आठवां ग्रह है नेप्चून पृथ्वी के मुक़ाबले में सूरज से लगभग तीस गुना अधिक दूर है और यह सौरमंडल का चौथा सबसे बड़ा ग्रह है यूरेनस सबसे ठंडा ग्रह उसके बाद नेपच्यून ही ठंडा ग्रह है नेपच्यून सूर्य से सबसे ज्यादा दूर होने के कारण सबसे ठंडा ग्रह नहीं है क्योंकि नेपच्यून के अंदर कार्बन कार्बन डाइऑक्साइड की कुछ मात्रा पाई जाती है वह सूर्य किरणों को अवशोषित कर लेती है या फिर ठीक है बहुत ज्यादा दूर होने के कारण इसको पृथ्वी से नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता पर यह पृथ्वी से देखने एक तारे की तरह दिखाई देता है टिमटिमाता हुआ इसका गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी के समान है बताया जाता है कि नेपच्यून के ऊपर हवाएं बहुत तेज चलती है इन हवाओं की रफ्तार लगभग 2100 किलोमीटर प्रति घंटे की सबसे होती है यह पृथ्वी के मुकाबले बहुत ज्यादा है

Neptune(वरुण)   ,, नेप्चून सूर्य से दूर हिसाब से सूर्य से दूरी के हिसाब से सौरमंडल का आठवां ग्रह है नेप्चून पृथ्वी के मुक़ाबले में सूरज से लगभग तीस गुना अधिक दूर है और यह सौरमंडल का चौथा सबसे बड़ा ग्रह है यूरेनस सबसे ठंडा ग्रह उसके बाद नेपच्यून ही ठंडा ग्रह है नेपच्यून सूर्य से सबसे ज्यादा दूर होने के कारण सबसे ठंडा ग्रह नहीं है क्योंकि नेपच्यून के अंदर कार्बन कार्बन डाइऑक्साइड की कुछ मात्रा पाई जाती है वह सूर्य किरणों को अवशोषित कर लेती है या फिर ठीक है बहुत ज्यादा दूर होने के कारण इसको पृथ्वी से नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता पर यह पृथ्वी से देखने एक तारे की तरह दिखाई देता है टिमटिमाता हुआ इसका गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी के समान है बताया जाता है कि नेपच्यून के ऊपर हवाएं बहुत तेज चलती है इन हवाओं की रफ्तार लगभग 2100 किलोमीटर प्रति घंटे की सबसे होती है यह पृथ्वी के मुकाबले बहुत ज्यादा है

Uranus(अरुण) ,यूरेनस सौरमंडल का चौथा सबसे बड़ा ग्रह है यूरेनस सौरमंडल का तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है जिस की खोज 13 मार्च 1781 को विलियम हर्शेल ने की थी और यह घर है सूर्य से दूरी के अनुसार सातवां ग्रह यह है युरेनस सूर्य से लगभग 29 करोड़ किलोमीटर दूर है और यह पृथ्वी से 63 गुना बड़ा और 15 गुना भारी है और युरेनस के 27 उपग्रह ज्ञात किए गए हैं एरियल मरिंडा आदि है और यूरेनस पर एक दिन लगभग 11 घंटे का होता है इसको पृथ्वी से नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता पर कई बारी रात के समय साफ आसमान में इसको दूरबीन के द्वारा देखा जा सकता है

Uranus(अरुण)   , यूरेनस सौरमंडल का चौथा सबसे बड़ा ग्रह है यूरेनस सौरमंडल का तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है जिस की खोज 13 मार्च 1781 को विलियम हर्शेल ने की थी और यह घर है सूर्य से दूरी के अनुसार सातवां ग्रह यह है युरेनस सूर्य से लगभग 29 करोड़ किलोमीटर दूर है और यह पृथ्वी से 63 गुना बड़ा और 15 गुना भारी है और युरेनस के 27 उपग्रह ज्ञात किए गए हैं एरियल मरिंडा आदि है और यूरेनस पर एक दिन लगभग 11 घंटे का होता है इसको पृथ्वी से नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता पर कई बारी रात के समय साफ आसमान में इसको दूरबीन के द्वारा देखा जा सकता है

Saturn (शनि) ,शनि ग्रह बृहस्पति ग्रह के बाद सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है इसकी सूर्य की दूरी के अनुसार सौरमंडल में छठा स्थान है इसकी सूर्य से दूरी लगभग 143 करोड़ किलोमीटर है यह सौरमंडल का सबसे हल्का ग्रह है यह इतना हल्का है कि यदि पानी में रख दिया जाए तो भी नहीं डूबेगा और बृहस्पति के बाद यह सबसे चमकीला ग्रह भी है यह चमकीला होने के कारण इसको पृथ्वी से में देखा जा सकता है यह ग्रह लगभग 96 प्रतिशत हाइड्रोजन पर 3% ही नियम और अन्य तत्वों जेसे मिथेन अमोनिया और फास्फीन से बना है शनि ग्रह के 62 उपग्रह देखे गए हैं और इसका व्यास भूमध्य रेखीय व्यास 1,20,536 किलो मीटर है और इस का औसतन तापमान लगभग -139 डिग्री सेल्सियस हैशनि ग्रह सूर्य के चारों ओर अपनी परिक्रमा 10 घंटे और 34 मिनट में पूरी कर लेता है जो बेस्ट बृहस्पति ग्रह के बाद सबसे तेज है इसलिए शनि ग्रह पर केवल 10 घंटे और 34 मिनट का ही दिन होता है

Saturn (शनि)   , शनि ग्रह बृहस्पति ग्रह के बाद सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है इसकी सूर्य की दूरी के अनुसार सौरमंडल में छठा स्थान है इसकी सूर्य से दूरी लगभग 143 करोड़ किलोमीटर है यह सौरमंडल का सबसे हल्का ग्रह है यह इतना हल्का है कि यदि पानी में रख दिया जाए तो भी नहीं डूबेगा और बृहस्पति के बाद यह सबसे चमकीला ग्रह भी है यह चमकीला होने के कारण इसको पृथ्वी से में देखा जा सकता है यह ग्रह लगभग 96 प्रतिशत हाइड्रोजन पर 3% ही नियम और अन्य तत्वों जेसे मिथेन अमोनिया और फास्फीन से बना है शनि ग्रह के 62 उपग्रह देखे गए हैं और इसका व्यास भूमध्य रेखीय व्यास 1,20,536 किलो मीटर है और इस का औसतन तापमान लगभग -139 डिग्री सेल्सियस हैशनि ग्रह सूर्य के चारों ओर अपनी परिक्रमा 10 घंटे और 34 मिनट में पूरी कर लेता है जो बेस्ट बृहस्पति ग्रह के बाद सबसे तेज है इसलिए शनि ग्रह पर केवल 10 घंटे और 34 मिनट का ही दिन होता है

Jupiter (बृहस्पति) बृहस्पति हमारे सौरमंडल का सूर्य की दूरी के अनुसार पांचवा ग्रह है यह मंडल का सौरमंडल का सबसे बड़ा घर है जो लगभग पृथ्वी से 3 गुना बड़ा है जुपिटर की खोज सन 1610 में खगोलिय ने की थी जुपिटर का गुरुत्वाकर्षण बल बहुत ज्यादा है जिससे यह एस्ट्रोनॉट को अपनी ओर खींचता रहता है और पृथ्वी को एस्ट्रोनॉट से बचाता है जुपिटर पर दिन और ग्रहों के मुकाबले छोटा होता है इसमें एक दिन केवल 9 घंटे 55 मिनट का होता है क्योंकि जुपिटर सूर्य के चारों ओर परिक्रमा इतने ही समय में कर लेता है और ग्रहों के मुकाबले सबसे तेज है इस ग्रह का आकार बड़ा होने के कारण यह सूर्य के चारों ओर तेजी से परिक्रमा कर लेता है कहा जाता है,सन 1973 से 2003 तक जुपिटर पर 8 मिशन भेज दिए गए हैं वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि जुपिटर पर लगभग लगभग पिछले 300 सालों से एक बवंडर चल रहा है यह बवंडर इतना बड़ा है कि इसमें तीन पृथ्वी समा जाए जुपिटर के चार उपग्रह है आयोग यूरोपा गनिमिड और कैलीस्टो और जुपिटर का गनिमिड उपग्रह सौरमंडल का सबसे बड़ा उपग्रह हैजुपिटर की सतह का तापमान लगभग माइनस 108 डिग्री सेल्सियस है क्योंकि जुपिटर पर 10% हीलियम और लगभग 85 प्रतिशत हाइड्रोजन और 5% कुछ अन्य गैसे पाई जाती है जुपिटर पर पानी 1% से भी कम मात्रा में पाया जाता है इसलिए जुपिटर पर जीवन लगभग संभव नहीं है|

 Jupiter (बृहस्पति)   बृहस्पति हमारे सौरमंडल का सूर्य की दूरी के अनुसार पांचवा ग्रह है यह मंडल का सौरमंडल का सबसे बड़ा घर है जो लगभग पृथ्वी से 3 गुना बड़ा है जुपिटर की खोज सन 1610 में खगोलिय ने की थी जुपिटर का गुरुत्वाकर्षण बल बहुत ज्यादा है जिससे यह एस्ट्रोनॉट को अपनी ओर खींचता रहता है और पृथ्वी को एस्ट्रोनॉट से बचाता है जुपिटर पर दिन और ग्रहों के मुकाबले छोटा होता है इसमें एक दिन केवल 9 घंटे 55 मिनट का होता है क्योंकि जुपिटर सूर्य के चारों ओर परिक्रमा इतने ही समय में कर लेता है और ग्रहों के मुकाबले सबसे तेज है इस ग्रह का आकार बड़ा होने के कारण यह सूर्य के चारों ओर तेजी से परिक्रमा कर लेता है कहा जाता है , सन 1973 से 2003 तक जुपिटर पर 8 मिशन भेज दिए गए हैं वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि जुपिटर पर लगभग लगभग पिछले 300 सालों से एक बवंडर चल रहा है यह बवंडर इतना बड़ा है कि इसमें तीन पृथ्वी समा जाए जुपिटर के चार उपग्रह है आयोग यूरोपा गनिमिड और कैलीस्टो और जुपिटर का गनिमिड उपग्रह सौरमंडल का सबसे बड़ा उपग्रह हैजुपिटर की सतह का तापमान लगभग माइनस 108 डिग्री सेल्सियस है...

(मंगल ग्रह)

Mars(मंगल)  , मंगल सौरमंडल का चौथा ग्रह है मंगल ग्रह की दूरी सूर्य से लगभग 22 करोड 79 लाख किलोमीटर है इस ग्रह का व्यास लगभग 6794 किलोमीटर है इस ग्रह किस ग्रह को लाल ग्रह भी कहा जाता है क्योंकि इस ग्रह की मिट्टी में पाए जाने वाले लोहा खनिज के जंग लगने के कारण इसकी मीठी लाल दिखाई देती है और इस ग्रह को दूर से देखने पर यह लाल दिखाई देते हैं वैज्ञानिकों ने खोज करने के बाद पता लगाया कि मंगल ग्रह की सतह काफी पुरानी है और मंगल ग्रह पर कुछ नदियां घाटियां साड़ियां और पठार भी है मंगल ग्रह पर एक ओलंपस मोंस पहाड़ी है जो माउंट एवरेस्ट से लगभग 3 गुना ऊंची है इस पहाड़ी की ऊंचाई लगभग 24 किलोमीटर है मंगल ग्रह का 1 दिन 24 घंटे से थोड़ा ज्यादा होता है मंगल ग्रह पर एक साल में पृथ्वी के 687 दिनों के बराबर है मंगल ग्रह पर पानी और कार्बन डाइऑक्साइड की बर्फ की परत में पाई जाती है.

Earth(पृथ्वी) ,तीसरा ग्रह पृथ्वी जो हमारा अपना घर है जिस पर हम रहते हैं इसके बारे में तो हम बहुत कुछ जानते हैं और आप पृथ्वी के बारे में कुछ जानना चाहते हैं

Earth(पृथ्वी)   , तीसरा ग्रह पृथ्वी जो हमारा अपना घर है जिस पर हम रहते हैं इसके बारे में तो हम बहुत कुछ जानते हैं और आप पृथ्वी के बारे में कुछ जानना चाहते हैं 

Venus (शुक्र) शुक्र हमारे सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह है यह सूर्य दुरी के हिसाब से सौरमंडल का दूसरा ग्रह है इसकी दुरी सूर्य से लगभग 82 करोड़ 10 लाख किलोमीटर है और यह ग्रह सबसे चमकीला ग्रह भी है यह पृथ्वी से भी देखा जा सकता है इस ग्रह का तापमान लगभग 437 डिग्री सेल्सियस है विनस ग्रह एक ऐसा ग्रह है जिस पर लगभग 1000 से ज्यादा ज्वालामुखी की खोज की है विनस का आकार लगभग हमारी धरती जितना है और यह अर्थ सिस्टर प्लेनेट के नाम से जाना जाता है विनस का वातावरण इतना घना है कि की अंदर की सतह को देख पाना लगभग नामुमकिन है और वीनस ऐसा प्लेनेट है जो यूरेनस को छोड़ कर बाकी दूसरे ग्रहों से उलटी दिशा की ओर घूमते हैं ग्रह काउंटर क्लॉक वाइज दी डायरेक्शन में घूमते हैं पर यूरेनस और वीनस क्लॉक वाइज डायरेक्शन घूमते हैं और विनस का भी कोई चंद्रमा नहीं है.By वनिता कासनियां पंजाब

Venus (शुक्र)   , शुक्र हमारे सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह है यह सूर्य दुरी के हिसाब से सौरमंडल का दूसरा ग्रह है इसकी दुरी सूर्य से लगभग 82 करोड़ 10 लाख किलोमीटर है और यह ग्रह सबसे चमकीला ग्रह भी है यह पृथ्वी से भी देखा जा सकता है इस ग्रह का तापमान लगभग 437 डिग्री सेल्सियस है विनस ग्रह एक ऐसा ग्रह है जिस पर लगभग 1000 से ज्यादा ज्वालामुखी की खोज की है विनस का आकार लगभग हमारी धरती जितना है और यह अर्थ सिस्टर प्लेनेट के नाम से जाना जाता है विनस का वातावरण इतना घना है कि की अंदर की सतह को देख पाना लगभग नामुमकिन है और वीनस ऐसा प्लेनेट है जो यूरेनस को छोड़ कर बाकी दूसरे ग्रहों से उलटी दिशा की ओर घूमते हैं ग्रह काउंटर क्लॉक वाइज दी डायरेक्शन में घूमते हैं पर यूरेनस और वीनस क्लॉक वाइज डायरेक्शन घूमते हैं और विनस का भी कोई चंद्रमा नहीं है. By वनिता कासनियां पंजाब

सौर मंडल के बारे में रोचक जानकारी सौरमंडल में 8 ग्रह हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण.,सौरमंडल में 9वां ग्रह प्लूटो था, लेकिन वैज्ञानिकों ने प्लूटो को ग्रह की श्रेणी से हटा दिया क्योंकि यह बहुत छोटा था.ग्रहों के उपग्रह भी होते हैं जो अपने ग्रहों की परिक्रमा करते हैं.सूर्य हमारी गैलेक्सी मिल्की वे से लगभग 30,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है.सूर्य मिल्की वे के चारो ओर 250 किमी/ सेकेंड की गति से परिक्रमा कर रहा है.मिल्की वे के चारो ओर घूमने में लगा वक्त 25 करोड़ वर्ष है, जिसे ब्रह्मांड वर्ष भी कहते हैं.सूर्य अपने अक्ष पर पूरब से पश्चिम की ओर घूमता है.हमारा सौरमंडल करीब 4.6 बिलियन वर्ष पहले अस्तित्व में आया.सूर्य हमारी पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है.ग्रहों में सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति और सबसे छोटा ग्रह बुध है.

सौर मंडल के बारे में रोचक जानकारी  सौरमंडल में 8 ग्रह हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण. , सौरमंडल में 9वां ग्रह प्लूटो था, लेकिन वैज्ञानिकों ने प्लूटो को ग्रह की श्रेणी से हटा दिया क्योंकि यह बहुत छोटा था. ग्रहों के उपग्रह भी होते हैं जो अपने ग्रहों की परिक्रमा करते हैं. सूर्य हमारी गैलेक्सी मिल्की वे से लगभग 30,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है. सूर्य मिल्की वे के चारो ओर 250 किमी/ सेकेंड की गति से परिक्रमा कर रहा है. मिल्की वे के चारो ओर घूमने में लगा वक्त 25 करोड़ वर्ष है, जिसे ब्रह्मांड वर्ष भी कहते हैं. सूर्य अपने अक्ष पर पूरब से पश्चिम की ओर घूमता है. हमारा सौरमंडल करीब 4.6 बिलियन वर्ष पहले अस्तित्व में आया. सूर्य हमारी पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है. ग्रहों में सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति और सबसे छोटा ग्रह बुध है.

Mercury (बुध) ,,बुध हमारे सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है और यह हमारे सौरमंडल का सबसे पहला ग्रह भी है जो सूर्य के सबसे करीब है यह सूर्य के करीब होने के कारण पर भी सबसे गर्म नहीं है क्योंकि इसके ऊपर कोई वातावरण नहीं है और वातावरण न होने के कारण इस में कार्बन डाइऑक्साइड गैस नहीं है जो सूर्य की किरणों को अवशोषित करती है और ग्रह को गर्म रख सके इसलिए यह ग्रह सूरज के सबसे करीब होने के कारण भी सबसे गर्म ग्रह नहीं है सूर्य से बुध ग्रह की दूरी सूर्य से लगभग 4करोड़ 60लाख किलोमीटर दूर है और बुध ग्रह की रात और दिन के तापमान में बहुत ज्यादा अंतर होता है दिन का तापमान लगभग 445 डिग्री सेल्सियस होता है और रात के तापमान में इतनी ज्यादा गिरावट हो जाती है कि वह-176 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है कि हम और यह ग्रह सौरमंडल का सबसे हल्का ग्रह भी है और इसके ऊपर इस ग्रह का कोई चंद्रमा भी नहीं है जो इसके ऊपर दिखाई दे बुध ग्रह कि सतह इतनी उबड़ खाबड़ है कि इसमें बहुत गहरे गहरे गड्ढे हुए हैं कई गडे तो सेंकडो किलोमीटर लंबे और 3 किलो मीटर गहरे भी है यदि आपको इस ग्रह को देखना है तो सुबह सुबह सूर्ये उगने से पहले देख सकते है

Mercury (बुध)   ,, बुध हमारे सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है और यह हमारे सौरमंडल का सबसे पहला ग्रह भी है जो सूर्य के सबसे करीब है यह सूर्य के करीब होने के कारण पर भी सबसे गर्म नहीं है क्योंकि इसके ऊपर कोई वातावरण नहीं है और वातावरण न होने के कारण इस में कार्बन डाइऑक्साइड गैस नहीं है जो सूर्य की किरणों को अवशोषित करती है और ग्रह को गर्म रख सके इसलिए यह ग्रह सूरज के सबसे करीब होने के कारण भी सबसे गर्म ग्रह नहीं है सूर्य से बुध ग्रह की दूरी सूर्य से लगभग 4करोड़ 60लाख किलोमीटर दूर है और बुध ग्रह की रात और दिन के तापमान में बहुत ज्यादा अंतर होता है दिन का तापमान लगभग 445 डिग्री सेल्सियस होता है और रात के तापमान में इतनी ज्यादा गिरावट हो जाती है कि वह-176 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है कि हम और यह ग्रह सौरमंडल का सबसे हल्का ग्रह भी है और इसके ऊपर इस ग्रह का कोई चंद्रमा भी नहीं है जो इसके ऊपर दिखाई दे बुध ग्रह कि सतह इतनी उबड़ खाबड़ है कि इसमें बहुत गहरे गहरे गड्ढे हुए हैं कई गडे तो सेंकडो किलोमीटर लंबे और 3 किलो मीटर गहरे भी है यदि आपको इस ग्रह को देखना है तो सुबह सुबह सू...

सौर मंडल के बारे में रोचक जानकारी जब भी आकाश की चर्चा की जाती है या सौरमंडल भी चर्चा की जाती है तो उसमें ग्रह की बात सबसे पहले की जाती है सौरमंडल में आठ ग्रह है ग्रहों की की विशेषता और कुछ कारण है जो इनको एक दूसरे से अलग बनाते हैं और क्या ऐसे कारण है जो इन सभी ग्रह को एक दूसरे से अलग बनाते हैं इन ग्रहों को दो कैटेगरी में बांटा गया है पहले चार ग्रहों को Terrestrial Planets कहा जाता है जो थोड़े ठोस प्रकार की है तो दूसरे चार ग्रहों को Gas Giants के नाम से जाना जाता है जो थोड़े कम ठोस है ज्यादातर गैस से निर्मित है पहले चार ग्रह Mercury Venus Earth Mars यह सब Terrestrial कैटेगरी में आते हैं और Jupiter., Saturn.Uranus.Neptune. गैस जेंट्स की कैटेगरी में आते हैं.

सौर मंडल के बारे में रोचक जानकारी  जब भी आकाश की चर्चा की जाती है या सौरमंडल भी चर्चा की जाती है तो उसमें ग्रह की बात सबसे पहले की जाती है सौरमंडल में आठ ग्रह है ग्रहों की की विशेषता और कुछ कारण है जो इनको एक दूसरे से अलग बनाते हैं और क्या ऐसे कारण है जो इन सभी ग्रह को एक दूसरे से अलग बनाते हैं इन ग्रहों को दो कैटेगरी में बांटा गया है पहले चार ग्रहों को Terrestrial Planets कहा जाता है जो थोड़े ठोस प्रकार की है तो दूसरे चार ग्रहों को Gas Giants के नाम से जाना जाता है जो थोड़े कम ठोस है ज्यादातर गैस से निर्मित है पहले चार ग्रह Mercury Venus Earth Mars यह सब Terrestrial कैटेगरी में आते हैं और Jupiter. ,  Saturn.Uranus.Neptune. गैस जेंट्स की कैटेगरी में आते हैं.

सौर मंडल के बारे में रोचक जानकारी सौरमंडल में पिंडों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है- परम्परागत ग्रह, बौने ग्रह और लघु सौरमंडलीय पिंड.परंपरागत ग्रह में बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और वरुण हैं.,बौने ग्रहों में प्लूटो, एरीज, सेरस, माकेमाके, हॉमिया हैं.लघु सौरमंडलीय पिंड में धूमकेतू, उपग्रह और अन्य छोटे खगोलीय पिंड शामिल हैं.सौरमंडल में बहुत ही छोटे- छोटे अरबों पिंड है जिन्‍हें धूमकेतू या पुच्छल तारे कहते हैं.चंद्रमा 6 ग्रहों और 3 बौने ग्रहों की परिक्रमा करता है.

सौर मंडल के बारे में रोचक जानकारी  सौरमंडल में पिंडों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है- परम्परागत ग्रह, बौने ग्रह और लघु सौरमंडलीय पिंड. परंपरागत ग्रह में बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और वरुण हैं. , बौने ग्रहों में प्लूटो, एरीज, सेरस, माकेमाके, हॉमिया हैं. लघु सौरमंडलीय पिंड में धूमकेतू, उपग्रह और अन्य छोटे खगोलीय पिंड शामिल हैं. सौरमंडल में बहुत ही छोटे- छोटे अरबों पिंड है जिन्‍हें धूमकेतू या पुच्छल तारे कहते हैं. चंद्रमा 6 ग्रहों और 3 बौने ग्रहों की परिक्रमा करता है.

सौर मंडल के बारे में रोचक जानकारी सौरमंडल में 8 ग्रह हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण.,सौरमंडल में 9वां ग्रह प्लूटो था, लेकिन वैज्ञानिकों ने प्लूटो को ग्रह की श्रेणी से हटा दिया क्योंकि यह बहुत छोटा था.ग्रहों के उपग्रह भी होते हैं जो अपने ग्रहों की परिक्रमा करते हैं.सूर्य हमारी गैलेक्सी मिल्की वे से लगभग 30,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है.सूर्य मिल्की वे के चारो ओर 250 किमी/ सेकेंड की गति से परिक्रमा कर रहा है.मिल्की वे के चारो ओर घूमने में लगा वक्त 25 करोड़ वर्ष है, जिसे ब्रह्मांड वर्ष भी कहते हैं.सूर्य अपने अक्ष पर पूरब से पश्चिम की ओर घूमता है.हमारा सौरमंडल करीब 4.6 बिलियन वर्ष पहले अस्तित्व में आया.सूर्य हमारी पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है.ग्रहों में सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति और सबसे छोटा ग्रह बुध है.

सौर मंडल के बारे में रोचक जानकारी  सौरमंडल में 8 ग्रह हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण. , सौरमंडल में 9वां ग्रह प्लूटो था, लेकिन वैज्ञानिकों ने प्लूटो को ग्रह की श्रेणी से हटा दिया क्योंकि यह बहुत छोटा था. ग्रहों के उपग्रह भी होते हैं जो अपने ग्रहों की परिक्रमा करते हैं. सूर्य हमारी गैलेक्सी मिल्की वे से लगभग 30,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है. सूर्य मिल्की वे के चारो ओर 250 किमी/ सेकेंड की गति से परिक्रमा कर रहा है. मिल्की वे के चारो ओर घूमने में लगा वक्त 25 करोड़ वर्ष है, जिसे ब्रह्मांड वर्ष भी कहते हैं. सूर्य अपने अक्ष पर पूरब से पश्चिम की ओर घूमता है. हमारा सौरमंडल करीब 4.6 बिलियन वर्ष पहले अस्तित्व में आया. सूर्य हमारी पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है. ग्रहों में सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति और सबसे छोटा ग्रह बुध है.

सौर मंडल के बारे में रोचक जानकारी By वनिता कासनियां पंजाब सौरमंडल में 8 ग्रह हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण.सौरमंडल में 9वां ग्रह प्लूटो था, लेकिन वैज्ञानिकों ने प्लूटो को ग्रह की श्रेणी से हटा दिया क्योंकि यह बहुत छोटा था.ग्रहों के उपग्रह भी होते हैं जो अपने ग्रहों की परिक्रमा करते हैं.सूर्य हमारी गैलेक्सी मिल्की वे से लगभग 30,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है.सूर्य मिल्की वे के चारो ओर 250 किमी/ सेकेंड की गति से परिक्रमा कर रहा है.मिल्की वे के चारो ओर घूमने में लगा वक्त 25 करोड़ वर्ष है, जिसे ब्रह्मांड वर्ष भी कहते हैं.सूर्य अपने अक्ष पर पूरब से पश्चिम की ओर घूमता है.हमारा सौरमंडल करीब 4.6 बिलियन वर्ष पहले अस्तित्व में आया.सूर्य हमारी पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है.ग्रहों में सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति और सबसे छोटा ग्रह बुध है.

सौर मंडल के बारे में रोचक जानकारी  By वनिता कासनियां पंजाब सौरमंडल में 8 ग्रह हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण. सौरमंडल में 9वां ग्रह प्लूटो था, लेकिन वैज्ञानिकों ने प्लूटो को ग्रह की श्रेणी से हटा दिया क्योंकि यह बहुत छोटा था. ग्रहों के उपग्रह भी होते हैं जो अपने ग्रहों की परिक्रमा करते हैं. सूर्य हमारी गैलेक्सी मिल्की वे से लगभग 30,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है. सूर्य मिल्की वे के चारो ओर 250 किमी/ सेकेंड की गति से परिक्रमा कर रहा है. मिल्की वे के चारो ओर घूमने में लगा वक्त 25 करोड़ वर्ष है, जिसे ब्रह्मांड वर्ष भी कहते हैं. सूर्य अपने अक्ष पर पूरब से पश्चिम की ओर घूमता है. हमारा सौरमंडल करीब 4.6 बिलियन वर्ष पहले अस्तित्व में आया. सूर्य हमारी पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है. ग्रहों में सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति और सबसे छोटा ग्रह बुध है.

ब्रह्मांड और अंतरिक्ष मे क्या अंतर है? By वनिता कासनियां पंजाब उत्तर:◆ब्रह्माण्ड -universe और अन्तरिक्ष-space में अंतर है भी और नहीं भी है। यह अन्तर इन दोनों शब्दों के प्रयोग और संदर्भ पर निर्भर है।◆व्यवहार में समुद्र तल से 100 किलो मीटर या 62 की ऊंचाई से अंतरिक्ष या स्पेस आरम्भ हो जाता है इसे karman line कारमन रेखा कहते हैं। चित्र नीचे दिया है।◆अंतरराष्ट्रीय विधि के अनुसार स्पेस या अंतरिक्ष का उपयोग करने का सभी देशों को अधिकार है पर इसमें इसकी ऊंचाई फिर भी परिभाषित नहीं है।पहले इन शब्दों की व्यापक दार्शनिक और वैज्ञानिक स्थिति पर चर्चा करते हैं।★ यदि ब्रह्माण्ड universe को एक अति अति अति विशाल इकाई मानें तो अंतरिक्ष इसके भीतर ही स्थित हुआ मानना पड़ेगा।हमारी पृथ्वी इसी अंतरिक्ष में स्थित है, हम अंतरिक्ष यान भेजते हैं, ब्रह्मांड यान नहीं।यहाँ अंतरिक्ष अर्थात, space, आकाश ,गतिविधियों को कर पाने की जगह ।★★ अब हम ऐसे विशालतम ब्रह्माण्ड को एक नहीं अनेक मानें तो वे सभी अनेक ब्रह्माण्ड अंततः अंतरिक्ष में space में ही स्थित होंगे।●आधुनिक ब्रह्माण्ड विज्ञान में बहुत सारे ब्रह्मांडों Multi universe की बात भी होती है और parallel universe समांतर ब्रह्माण्ड की बात भी वैज्ञानिक करते हैं।●ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है कि नारद जी ने वैकुण्ठ लोक की बिरजा नदी में अनंत ब्रह्माण्ड पत्थर के टुकड़ों की तरह लुढ़कते देखे।●योग वाशिष्ठ में भी कई संस्तर लेयर्स में कई पैरेलल यूनिवर्स समानांतर ब्रह्मांड की चर्चा रानी लीला व देवी सरस्वती के बीच है।इन सभी तरह के ब्रह्मांडों के लिए स्थान तो लगेगा ही वही स्थान अंतरिक्ष या आकाश या स्पेस space है।जैसे कि हम अनंत आकाश गंगाओं गैलेक्सीज को अपने अंतरिक्ष में देखते हैं। और हम स्वयं भी अंतरिक्ष में स्थित हैं●● दरअसल अंतरिक्ष ,आकाश स्पेस या जगह या स्थान सभी को चाहिए होता है: चाहे बहुत बड़ी ब्रह्माण्ड की बात हो या सूक्षतम परमाणु या क्वांटा या क्वार्क इन सभी की भीतरी संरचना में स्पेस अंतरिक्ष आकाश होगा ही।पँचतत्वों की दृष्टि से आकाश सभी तत्वों में व्याप्त होता है।●अंतरिक्ष या स्पेस या आकाश के बिना पदार्थ मय ब्रह्माण्ड के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती।● ब्रह्माण्ड में और कण में- सभी में अंतरिक्ष (स्पेस खाली स्थान ) व्याप्त है; जबकि इसके उलट अंतरिक्ष स्पेस में ही स्थूल स्तर पर एक या अनेक ब्रह्माण्ड भी व्याप्त हैंऔर सूक्ष्म स्तर पर कण भी व्याप्त हैं।◆ सीमित अर्थ में अन्तरिक्ष में पक्षी उड़ रहे का अर्थ होता है हमारे देखने की सीमा में या अधिक हुआ तो पृथ्वी के ऊपर के आकाश में ।●सार यह कि ब्रह्मांड,universe, cosmos शब्द और अंतरिक्ष शब्द इन दोनों के अर्थ में अन्तर का अनुमान सन्दर्भ के अनुसार करना चाहिए।★★ व्यवहार में पृथ्वी से स्पेस या अंतरिक्ष के आरम्भ होने की सीमा क्या है?चित्र :विकीपीडिया से साभार◆अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पृथ्वी के समुद्र तल से 100 किलोमीटर अथवा 62 मील तक की ऊंचाई के बाद से अंतरिक्ष का आरम्भ माना जाता है।पृथ्वी और अंतरिक्ष के बीच इस विभाजक रेखा को करमान लाइन KARMAN line कहा जाता है।इस ऊंचाई पर सामान्यतः वायुयान हवा के विरल दबाव के कारण उड़ नहीं सकते।इसी के आगे अंतरिक्ष यान space craft 205 से 275 मील के बीच पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं।यह औसत200 मील की ऊंचाई भी अंतरिक्ष की एक दूसरी सीमा है।इसके आगे 600 मील से ऊपर वायुमण्डल अति विरल हो जाने से सूर्य मण्डल की सौर प्रवाह सोलर विंड पृथ्वी की इस ऊपरी आवरण को निरन्तर प्रभावित करता रहता है।

ब्रह्मांड और अंतरिक्ष मे क्या अंतर है? By वनिता कासनियां पंजाब उत्तर: ◆ब्रह्माण्ड -universe और अन्तरिक्ष-space में अंतर है भी और नहीं भी है। यह अन्तर इन दोनों शब्दों के प्रयोग और संदर्भ पर निर्भर है। ◆व्यवहार में समुद्र तल से 100 किलो मीटर या 62 की ऊंचाई से अंतरिक्ष या स्पेस आरम्भ हो जाता है इसे karman line कारमन रेखा कहते हैं। चित्र नीचे दिया है। ◆अंतरराष्ट्रीय विधि के अनुसार स्पेस या अंतरिक्ष का उपयोग करने का सभी देशों को अधिकार है पर इसमें इसकी ऊंचाई फिर भी परिभाषित नहीं है। पहले इन शब्दों की व्यापक दार्शनिक और वैज्ञानिक स्थिति पर चर्चा करते हैं। ★ यदि ब्रह्माण्ड universe को एक अति अति अति विशाल इकाई मानें तो अंतरिक्ष इसके भीतर ही स्थित हुआ मानना पड़ेगा। हमारी पृथ्वी इसी अंतरिक्ष में स्थित है, हम अंतरिक्ष यान भेजते हैं, ब्रह्मांड यान नहीं।यहाँ अंतरिक्ष अर्थात, space, आकाश ,गतिविधियों को कर पाने की जगह । ★★ अब हम ऐसे विशालतम ब्रह्माण्ड को एक नहीं अनेक मानें तो वे सभी अनेक ब्रह्माण्ड अंततः अंतरिक्ष में space में ही स्थित होंगे। ●आधुनिक ब्रह्माण्ड विज्ञान में बहुत सारे ब्रह्...

ईश्वर कहाँ रहता है ? By वनिता कासनियां पंजाब ईश्वर कहाँ रहता है ?अस्वीकरण: इस उत्तर में प्रगट किए गए विचारों से कोई भी असहमत हो सकता है।✍️ वैसे यह सवाल आस्तिकों केलिए ही नहीं, नास्तिकों केलिए भी महत्वपूर्ण है।क्योंकि नास्तिक भी तब ही नास्तिक बनते हैं, जब उन्हे ईश्वर के होने का कोई तथ्य यां सबूत नजर नहीं आता। विज्ञान भी हाथ खड़े कर देता है।तो नास्तिक भी उसके पीछे पीछे चलने लगता है।तो आज हम अवश्य बताएंगे कि वो अनंत, वो सत्य कहां रहता है। जिसकी शक्ति से पूरी सृष्टि गतिमान है।अब अगर हम सबसे प्राचीन वेदों और गीता को आधार बनाते हुए, उनके इशारे को समझें, तो सृष्टि यां ब्रह्मांड ऐसे पेड़ के बराबर हैं, जिसकी जड़ें उपर की और हैं और फल फूल नीचे की और हैं।यानी उल्टा।जैसे मनुष्य के शरीर का सहस्त्रार चक्र एक पेड़ की जड़ यां बीज के समान है और मूलाधार चक्र एक फल और फूल के।ऐसे ही ब्रह्मांड रूपी पेड़ में, समूह मनुष्य, जानवर, पेड़ पौधे आदि फल और फूल के रूप में हैं और पेड़ रूपी ब्रह्मांड की जड़ें और बीज उपर की और है, बहुत उपर की और।अब जैसे हम पृथ्वी पर हैं तो इसे भूलोक कहा जाता है। ऐसे ही उपर बढ़ते जाएं तो स्वर्गलोक, फिर तप लोग और अंत यां आदि में सत्यलोक है।यानी अंतरिक्ष से अरबों योजन दूर सत्य लोक है।जिसको ऋग्वेद में ऋतधाम कहा गया है और गीता में परमधाम।यहां पर उस अनंत, अजन्मे, निराकार और सत्य, ईश्वर का वास है। जिस की शक्ति यां प्रकाश से सारा ब्रह्मांड गतिमान है।मनुष्य वहां सिर्फ मोक्ष के बाद, पवित्र आत्मा के रूप में ही जा सकता है।यहां कोई जन्म मृत्यु नहीं है, सिर्फ अमरता है।तो ब्रह्मांड में मनुष्य क्या सभी प्रकार के जीव जंतु, पेड़ उस अनंत की शक्ति से ही चलायमान हैं।अब विज्ञान कहता है कि हम पृथ्वी पर 3 आयाम (Demension) में रह रहे हैं, यानी 3D.जैसे आगे पीछे, दाएं बाएं और उपर नीचे। यानी लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई यां गहराई।हम सिर्फ इसके बारे में जानते हैं।पर चौथा आयाम समय भी है।तो विज्ञान भी मानता है कि ब्रह्मांड में10 आयाम हो सकते हैं।वेद 64 आयाम की बात करता हैं।यह आयाम अवश्य हो सकते हैं, पर भूलोक में नहीं, उपर के लोकों में।जिसके बारे विज्ञान ग्रहों, ग्लैक्सियों, वॉर्म होल, ब्लैक होल की बात करता है तो वेद जैसे शास्त्र इन्हे लोक कहते हैं।शायद आज भी विज्ञान ब्रह्मांड के बारे में बहुत कम जानता है।क्योंकि हमारा ब्रह्मांड आज भी बहुत सारे रहस्य समेटे हुए हैं। जिनसे पर्दा हटना बाकी है।यह यूहीं नहीं चल रहा है। इन्हे कोई ना कोई शक्ति तो अवश्य चला रही है।वहीं शक्ति, जिन्हे अनंत कह लो, अजन्मा कह लो, निराकार कह लो यां सत्य कह लो। जिसे आदि कह लो यां अंत कह लो यां शून्य कह लो।बात एक ही है। वही तो ईश्वर है।बहुत बहुत धन्यवाद। 🙏🙏चित्र स्रोत:सभी चित्र विषय की स्पष्टता केलिए गूगल इमेजेस के द्वारा लिए गए हैं, आभार सहित। जिनके अधिकार, इनके असल मालिकों के पास पूर्ण सुरक्षित हैं।

ईश्वर कहाँ रहता है ? By वनिता कासनियां पंजाब ईश्वर कहाँ रहता है ? अस्वीकरण:  इस उत्तर में प्रगट किए गए विचारों से कोई भी असहमत हो सकता है। ✍️  वैसे यह सवाल आस्तिकों केलिए ही नहीं, नास्तिकों केलिए भी महत्वपूर्ण है। क्योंकि नास्तिक भी तब ही नास्तिक बनते हैं, जब उन्हे ईश्वर के होने का कोई तथ्य यां सबूत नजर नहीं आता। विज्ञान भी हाथ खड़े कर देता है। तो नास्तिक भी उसके पीछे पीछे चलने लगता है। तो आज हम अवश्य बताएंगे कि वो अनंत, वो सत्य कहां रहता है। जिसकी शक्ति से पूरी सृष्टि गतिमान है। अब अगर हम सबसे प्राचीन वेदों और गीता को आधार बनाते हुए, उनके इशारे को समझें, तो सृष्टि यां ब्रह्मांड ऐसे पेड़ के बराबर हैं, जिसकी जड़ें उपर की और हैं और फल फूल नीचे की और हैं। यानी उल्टा। जैसे मनुष्य के शरीर का सहस्त्रार चक्र एक पेड़ की जड़ यां बीज के समान है और मूलाधार चक्र एक फल और फूल के। ऐसे ही ब्रह्मांड रूपी पेड़ में, समूह मनुष्य, जानवर, पेड़ पौधे आदि फल और फूल के रूप में हैं और पेड़ रूपी ब्रह्मांड की जड़ें और बीज उपर की और है, बहुत उपर की और। अब जैसे हम पृथ्वी पर हैं तो इसे भूलोक कहा जाता है। ऐस...